Sunday, March 1, 2009

फर्स्ट डीविजन लाने से कोई पत्रकार नहीं बन सकता - पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ



भारतीय जनसंचार संस्थान में प्रेस क्लब आफ इंडिया के महासचिव पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने हिन्दी पत्रकारिता विभाग के छात्रों को संबोधित करते हुये कहा कि अगर कोई यह सोचता है कि प्रथम श्रेणी से पास होकर कोई पत्रकार बन गया है – तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। फर्स्ट डीविजन लाने से कोई पत्रकार नहीं बन सकता। शिक्षकों से आपको थोड़ा बहुत गाईड लाईन मिल सकता है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। उन्होंने बताया कि वो अपने पत्रकारिता जीवन में कभी भी कोर्स की चीजों को लागू नहीं किया लेकिन क्लास के बाहर शिक्षकों से जो बातचीत किया वो जरुर काम आया।
आज के युवा पत्रकार के बारे में कुलश्रेष्ठ जी कहतें हैं कि युवा पत्रकार अपनी स्पष्ट सोच के साथ लक्ष्य का निर्धारण नहीं करते। युवा पत्रकार सोचते हैं कि वो अपनी मनमर्जी से काम करेंगे, लेकिन जब ऐसा कार्यक्षेत्र में नहीं होता है तो वह घबरा जाता है। आज 90 फीसदी पत्रकार राजनीतिज्ञ पत्रकार बनना चाहता है जबकि इस क्षेत्र में पहले से ही काफी भीड़ है। कई दिग्गज पहले से ही अपनी पैठ बना चुके हैं। हरेक साल चार से पांच सौ बच्चे पत्रकारिता का कोर्स कर इस क्षेत्र में आते है जबकि पहले से ही इस क्षेत्र में काफी प्रतियोगिता बनी हुई है। इसलिये आप ऐसे क्षेत्र का चुनाव करें जिसमें आपकी उपयोगिता बनी रहे। जैसे खेल, पर्यावरण, विज्ञान का क्षेत्र। इनमें अभी भी दिग्गजों का अभाव है, भीड़ कम है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुये कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि हिन्दी पत्रकारिता में जिसने कोर्स किया वो सोचते हैं कि उन्हें अंग्रेजी जानने की कोई जरुरत नहीं या वो अंग्रेजी जानने को अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। अच्छे पत्रकार बनने के लिये आपको 70 फीसदी अंग्रेजी में पकड़ बहुत जरुरी है। आज की पत्रकारिता की आलोचना करते हुये वे कहते हैं कि आज कोई भी प्रोपर्टी डीलर अपने फायदे के लिये अखबार निकालते हैं। कल को अगर उनके स्वंय के फायदे खत्म हो जाते हैं तो वो अखबार बंद कर देते हैं। यानि किसी भी वक्त आप जॉब से बाहर हो सकते हैं। अगर अखबार से मालिक को फायदा नहीं होगा तो समझो अखबार बंद। आपके अखबार को भी आपके मालिक, बाजारवाद, विज्ञापन आदि तय करता है इसका मतलब है कि आपको बीच का रास्ता अख्तियार करना होगा।

Friday, February 20, 2009

आर्थिक सर्वेक्षण की मुख्य बातें


वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2007-08 का आर्थिक सर्वेक्षण संसद के दोनों सदनों में पेश किया.
इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था का भारत पर असर पड़ने और विकास की गति घटने की आशंका जताई गई है.


मुख्य बातें


वित्त वर्ष 2007-08 में आर्थिक विकास दर 8.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद.
महँगाई दर 5.6 फ़ीसदी से घट कर 4.1 फ़ीसदी होने की संभावना.
कर वसूली में भारी वृद्धि.
बुनियादी संरचना में आ जा रही अड़चनों और उपभोक्ता सामान के क्षेत्र में मंदी पर चिंता.
मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था एक खरब डॉलर को पार कर सकती है.
वित्तीय सेवाओं में लगभग 14 फ़ीसदी की वृद्धि.
अमरीकी बैंकिंग कारोबार में अस्थिरता के असर का आकलन करना मुश्किल और इस पर अनिश्चितता की स्थिति.
वर्ष 2006-07 में विदेशी निवेश 150 प्रतिशत बढ़ा.
सड़क, बंदरगाह, बिजली जैसी बुनियादी संरचना को मज़बूत बनाने की ज़रूरत.
निजी क्षेत्र के लिए सरल और ठोस नीति की आवश्यकता.
सामाजिक क्षेत्र में सरकारी निवेश सात वर्षों में 16 प्रतिशत बढ़ा.
कृषि पर संकट बरकरार. कृषि उत्पादन में कमी होने की आशंका.